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Monday, 27 February 2017

VIDEO : खूब वायरल हो रहा बाबा का कारनामा


हमारे देश में प्राचीन काल से ही कई तरह की प्रथाओ और अंधविश्वासों का बोलबाला रहा हैं। लोग आंख मूंद कर इन पर विश्वास करते हैं और पूरी श्रद्धा से इनका पालन भी करते हैं। अंधविश्वास एक ऐसी समस्या जिसका समाधान सामने होते हुये भी कोसो दूर हैं। लोगों के इसी अंधविश्वास का फायदा उठाते हैं कुछ ढोंगी बाबा। ये बाबा लोगो की मजबूरी और अंधविश्वास का फायदा उठा कर उनसे वो सब करवाते हैं जो वो चाहते हैं और जब तक लोग कुछ समझ पाएं तब तक बहुत देर हो चुकी होती हैं। बाबाओं का महिलायों के साथ छेड़छाड़ और रेप करने की खबरे अक्सर आती रहती हैं ये बाबा लोगों को डरा धमका अपने बस में उन्हें कर के उनके साथ अपनी मर्ज़ी से सब करते हैं।


इस वीडियो में ऐसे ही एक बाबा को कुछ ऐसा करते हुए दिखाया गया हैं। देखिये विश्वास और आस्था के नाम पर क्या-क्या किया जाता हैं।











37 सैनिकों ने इस्लाम कबूल किया इस्लाम, अदा की पहली सामूहिक नमाज

दक्षिणी कोरिया: 24 फ़रवरी शुक्रवार को सियोल के हानाम दांग क्षेत्र की एक मस्जिद में दक्षिणी कोरिया के 37 सैनिकों ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया हैं. ये सभी सैनिक इराक़ भेजे जाने हैं.

इन सैनिकों में 11वीं ब्रिगेड के कैप्टन सून जीनगू भी शामिल हैं. शुक्रवार को आधिकारिक रूप से इस्लाम को अपनाते हुए उन्होंने सबसे पहले इस्लामिक नियमों के अनुसार ग़ुस्ल किया, फिर नमाज़े जुमा के समय मस्जिद के इमाम की मदद से कलमा पढ़ कर इस्लाम स्वीकार कर लिया.


इस्लाम धर्म में आ चुके इन सभी सैनिकों ने अन्य नमाज़ियों ने के साथ नमाज अदा की. कैप्टन सून जीनगू ने इस्लाम धर्म अपनाने के बारें में कहा कि इस्लाम अन्य धर्मों की तुलना में अधिक शांतिप्रेमी और मानवताप्रेमी है. मुझे लगता है कि अगर हम धर्म के माध्यम से अपने इलाक़े के लोगों से संपर्क साधें तो शांति की बहाली में बड़ी मदद करेंगे.


1वीं ब्रिगेड के विशेष सैनिकों में से एक पाक सियोंग ओक ने कहा कि मैंने विश्व विद्यालय में अरबी भाषा सीखी है इस लिए मुझे क़ुरआने मजीद का भी कुछ ज्ञान है. इस्लाम की ओर मेरा बहुत अधिक रुझान हो गया था इस लिए मैंने मुसलमान होने का फ़ैसला किया.


उन्होंने कहा कि अगर मुझे इराक़ भेजा गया तो मैं चाहूंगा कि स्थानीय लोगतं के साथ उनके धार्मिक समारोहों में भाग लूं ताकि वे हमारे साथ भाईचारे की भावना महसूस कर सकें और मैं उन्हें यह समझा सकूं कि कोरिया के सैनिक अतिग्रहण के लिए नहीं आए हैं बल्कि वे मानवताप्रेम के समर्थन के लिए भेजे गए हैं. (कोहराम से)





एफडीआई राष्ट्रवाद है तब इस्ट इंडिया कम्पनी को भगाया ही क्यो था ? -काव्याह यादव

सोशल मीडिया एक स्वतंत्रता का नदोलन बन कर उभर रहा है, सोशल मीडिया पर अनेक विद्रोही विचारक अपने विचार निडरता से रखने में पीछे नहीं हट रहे. विद्रोहियों के लिए आम लोगो में अपने विचार रखना इससे पहले बहुत ही मुश्किल था, जबसे सोशल मीडिया की शुरुआत हुई बहुजनो को एक बढ़िया प्लेटफोर्म मिल गया जो उनके लिए एक क्रान्ति का हथियार साबित हो रहा है. बहुजनो पर हो रहे अन्याय, अत्याचार को सत्ताधारियो का कठपुतली मीडिया छुपाता था, लेकिन आज का यह दौर वो दौर है जिस दौर में सोशल मीडिया आगे आगे और इलेक्ट्रोनिक मीडिया पीछे पीछे चल रहा है. ऐसे ही एक बहुजन हित में काव्याह यादव के बेबाक विचार

पढ़े : सावधान! आपके आसपास कहीं भी हो सकता है भूत, जानने के लिए देखिये ये वीडियो

#देश_की_प्रगति_के_लिए_सभी_देशवासियों_की_प्रगति_आवश्यक_है
LIBERALISATION, PRIVETISATION और GLOBALISATION को ख़ुशी ख़ुशी लाया जाता है। पब्लिक सेक्टर का डि-रेगुलराइजेशन आरम्भ हो जाता है। शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को आम बजट में कोई खास जगह नहीं दी जाती है। इन दोनों का तेजी से निजीकरण शुरू हो जाता है। देश की निजी कंपनियों को अपार प्रोत्साहन दिया जाता है और उन्हें किसानों से कई गुना ज्यादा सब्सिडी दी जाती है। 
पब्लिक सेक्टर तथा सरकारी संस्थानों के निजी हाथों में चले जाने से वहां #आरक्षण का कोई स्कोप ही नहीं बचता है, अतः देश की प्रतिक्रियावादी ताकतों ने अपने निजी हितों के सरंक्षण में देश की प्रगति पर कुठाराघात कर दिया।

जबकि इन प्रतिक्रियावादी ताकतों को आरक्षण को दक्षिण अफ्रीका में लागू“ #AFFIRMATIVE ACTION” के रूप में देखना चाहिए। जब दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों ने अपने अधिकारों के लिए आन्दोलन शुरू किया और राजनैतिक-आर्थिक-शैक्षिक-सांस्कृतिक यानि हर क्षेत्र में हिस्सेदारी की मांग की तो वहां के शोषक वर्ग ने स्वयं बढ़कर उन्हें आर्थिक-राजनैतिक तथा शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण दे दिया.

देखें सबसे शॉकिंग वीडियोः जिसने देखा रो पड़ा! जानिए इस वीडियो में ऐसा क्या है?

दक्षिण अफ्रीका में अश्वेत बहुसंख्यक है अतः उनके हक़-हकूक को किनारे करना देश को पतन के रास्ते पर ले जाना है। देश की प्रगति के लिए सभी देशवासियों की प्रगति आवश्यक है, आज वहां श्वेत तथा अश्वेत दोनों मिलकर देश की उन्नति में लगे हुए है। दक्षिण अफ्रीका को 1992 में आजादी मिली और आज वो अफ्रीका महादेश के एक विकसित देश के रूप में उभर रहा है। लेकिन भारत ने वो मौका खो दिया. 

यहाँ का अल्पसंख्यक-शोषक वर्ग ने अपने टूटते वर्चस्व को बचाने के लिए अपना अंतिम प्रयास कर रहा है और देश को पूंजीवादी कार्टेल के हाथो में बेचने के लिए तैयार बैठा है . और अब तो शतप्रतिशत विदेशी निवेश को भी राष्ट्रवाद घोषित किया जा रहा है अगर एफडीआई राष्ट्रवाद है तब इस्ट इंडिया कम्पनी को भगाया ही क्यो था ?